स्वर संधि के प्रमुख नियम एवं उदाहरण
"स्वर संधि के पाँच प्रमुख भेदों से शब्दों के सौंदर्य और व्याकरण के रहस्य जानिए।"
A Today you'll learn
- दो समीपवर्ती वर्णों के मेल से उत्पन्न विकार को "संधि" के रूप में समझना।
- स्वर संधि के पाँच प्रमुख भेदों (दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण, अयादि) के नियमों को जानना।
- सरल और संयुक्त शब्दों का सही संधि-विच्छेद करना।
B Let's understand
दो समीपवर्ती ध्वनियों (वर्णों) के आपस में मिलने से जो विकार (परिवर्तन) उत्पन्न होता है, उसे व्याकरण में "संधि" कहते हैं। जब दो स्वरों के आपस में मिलने से परिवर्तन होता है, तो उसे "स्वर संधि" कहा जाता है। स्वर संधि के पाँच मुख्य भेद होते हैं: 1) दीर्घ संधि: जब ह्रस्व या दीर्घ अ, इ, उ के बाद वही समान स्वर आए, तो दोनों मिलकर दीर्घ (आ, ई, ऊ) बन जाते हैं (जैसे—हिम + आलय = हिमालय, विद्या + अर्थी = विद्यार्थी)। 2) गुण संधि: अ/आ के बाद इ/ई आए तो ‘ए’, उ/ऊ आए तो ‘ओ’ तथा ऋ आए तो ‘अर्’ बनता है (जैसे—नर + ईश = नरेश, महा + उत्सव = महोत्सव, देव + ऋषि = देवर्षि)। 3) वृद्धि संधि: अ/आ के बाद ए/ऐ आए तो ‘ऐ’ तथा ओ/औ आए तो ‘औ’ हो जाता है (जैसे—एक + एक = एकैक, महा + औषधि = महौषधि)। 4) यण संधि: इ/ई का ‘य’, उ/ऊ का ‘व’ और ऋ का ‘र’ बन जाता है (जैसे—यदि + अपि = यद्यपि, सु + आगत = स्वागत)। 5) अयादि संधि: ए, ऐ, ओ, औ के बाद अन्य स्वर आने पर क्रमशः अय्, आय्, अव्, आव् हो जाता है (जैसे—ने + अन = नयन, पौ + अक = पावक)।
C See it step by step
- चरण 1: विद्या (आ) + आलय (आ) -> दोनों समान स्वर मिलकर ‘आ’ बनते हैं। शब्द: "विद्यालय" (दीर्घ स्वर संधि)।
- चरण 2: सूर्य (अ) + उदय (उ) -> ‘अ’ और ‘उ’ मिलकर ‘ओ’ बनते हैं। शब्द: "सूर्योदय" (गुण स्वर संधि)।
- चरण 1: स्वागत -> सु + आगत (यण संधि, जहाँ ‘उ’ का ‘व्’ बन गया)।
- चरण 2: नयन -> ने + अन (अयादि संधि, जहाँ ‘ए’ का ‘अय्’ बन गया)।
D Your turn
E Ready to practise?
Key idea 1
दो निकटवर्ती वर्णों के परस्पर मेल से होने वाले विकार को संधि कहते हैं।
Key idea 2
दो स्वरों के मेल से होने वाले परिवर्तन को स्वर संधि कहते हैं।
स्वर संधि के 5 भेद हैं
स्वर संधि के 5 भेद हैं: दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण और अयादि।
Key idea 4
दीर्घ संधि में समान स्वर मिलकर हमेशा दीर्घ (आ, ई, ऊ) बनते हैं।
Key idea 5
संधि-विच्छेद का अर्थ है जुड़े हुए शब्दों को पुनः अलग-अलग करना।
