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समास का परिचय एवं विग्रह

"समास की परिभाषा, पद-प्रधानता और तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु, द्वंद्व तथा बहुव्रीहि समास का विग्रह।"

FREE TOPIC 3 learning goals · Class 5 · Hindi · Topic 2

A Today you'll learn

  • दो या दो से अधिक शब्दों के मेल से संक्षिप्त शब्द बनाने की प्रक्रिया को "समास" के रूप में समझना।
  • प्रमुख समासों (तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु, द्वंद्व) की पहचान करना।
  • समस्त पद का सही समास-विग्रह करना और समास का नाम बताना।

B Let's understand

अ

दो या दो से अधिक शब्दों के मेल से नया सार्थक संक्षिप्त शब्द बनाने की विधि को "समास" कहते हैं। समास द्वारा बने नए शब्द को "समस्त पद" या "सामासिक पद" कहा जाता है, और जब उन शब्दों को अलग-अलग करके उनके बीच का संबंध स्पष्ट किया जाता है, तो उसे "समास-विग्रह" कहते हैं। मुख्य भेद: 1) तत्पुरुष समास: इसमें दूसरा पद (उत्तर पद) प्रधान होता है और दोनों पदों के बीच कारक चिह्नों (का, के, की, में, पर, से) का लोप होता है (जैसे—राजपुत्र = राजा का पुत्र; देशप्रेम = देश के लिए प्रेम)। 2) कर्मधारय समास: इसमें पहला पद विशेषण और दूसरा विशेष्य होता है, या उपमान-उपमेय का संबंध होता है (जैसे—नीलकमल = नीला है जो कमल; चंद्रमुख = चंद्रमा के समान मुख)। 3) द्विगु समास: इसमें पहला पद संख्यावाचक विशेषण होता है और यह समूह का बोध कराता है (जैसे—चौराहा = चार राहों का समूह; तिरंगा = तीन रंगों का समाहार)। 4) द्वंद्व समास: इसमें दोनों पद समान रूप से प्रधान होते हैं और विग्रह करने पर ‘और’, ‘या’ लगता है (जैसे—माता-पिता = माता और पिता; दिन-रात = दिन और रात)।

C See it step by step

Example 1: ‘चौराहा’ और ‘गंगाजल’ का समास-विग्रह कीजिए और भेद बताइए।
  1. चरण 1: चौराहा -> विग्रह: "चार राहों का समूह"। पहला पद संख्या (चार) है -> द्विगु समास।
  2. चरण 2: गंगाजल -> विग्रह: "गंगा का जल"। संबंध कारक चिह्न ‘का’ का लोप है -> तत्पुरुष समास।
Example 2: ‘नीलकंठ’ और ‘माता-पिता’ का विग्रह कीजिए।
  1. चरण 1: नीलकंठ -> "नीला है जो कंठ" (कर्मधारय समास, विशेषण + विशेष्य)।
  2. चरण 2: माता-पिता -> "माता और पिता" (द्वंद्व समास, दोनों पद प्रधान)।

D Your turn

‘त्रिफला’ में कौन-सा समास है?
Look back at "Let's understand" above for a clue.

E Ready to practise?

Ready for live, 1:1 teaching on this topic?