पत्र लेखन: अनौपचारिक पत्र
"मित्रों और सगे-संबंधियों को लिखे जाने वाले अनौपचारिक पत्रों का प्रारूप और लेखन।"
A Today you'll learn
- पत्र लेखन के महत्त्व और उसके प्रकारों (औपचारिक और अनौपचारिक) को समझना
- अनौपचारिक पत्र (सगे-संबंधियों, मित्रों को लिखे जाने वाले पत्र) का सही प्रारूप सीखना
- संबोधन, अभिवादन, मुख्य विषय और समाप्ति को शिष्टाचार के साथ लिखना
B Let's understand
पत्र लेखन दूर बैठे मित्रों, परिजनों और अधिकारियों तक अपने विचार, कुशल-क्षेम और संदेश पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम है। पत्र मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं: 1. अनौपचारिक पत्र: जो अपने माता-पिता, भाई-बहन, मित्रों और रिश्तेदारों को लिखे जाते हैं। 2. औपचारिक पत्र: जो प्रधानाचार्य, अधिकारियों या व्यापारिक संस्थाओं को लिखे जाते हैं। अनौपचारिक पत्र का प्रारूप: सबसे ऊपर बाईं ओर पत्र भेजने वाले का पता और दिनांक लिखा जाता है। फिर संबोधन (जैसे: पूज्य पिताजी, प्रिय मित्र), अभिवादन (जैसे: सादर प्रणाम, सप्रेम नमस्ते), उसके बाद कुशल-क्षेम और मुख्य संदेश लिखा जाता है। अंत में पत्र लेखक का संबंध और नाम (जैसे: आपका आज्ञाकारी पुत्र / तुम्हारी प्रिय सखी) लिखा जाता है।
C See it step by step
- संबोधन: "प्रिय मित्र रोहन" या "प्रिय सखी स्नेहा"।
- अभिवादन: "सप्रेम नमस्ते" या "स्नेह मिलन"।
- पिताजी के प्रति आदर प्रकट करते हुए लिखा जाता है: "आपका आज्ञाकारी पुत्र / आपकी आज्ञाकारिणी पुत्री", और नीचे अपना नाम।
D Your turn
E Ready to practise?
पत्र दो प्रकार के होते हैं
पत्र दो प्रकार के होते हैं: अनौपचारिक और औपचारिक।
Key idea 2
अनौपचारिक पत्र परिजनों और मित्रों को लिखे जाते हैं।
बड़ों के लिए संबोधन
बड़ों के लिए संबोधन: "पूज्य", "आदरणीय"; अभिवादन: "सादर प्रणाम", "चरण स्पर्श"।
छोटों या मित्रों के लिए
छोटों या मित्रों के लिए: "प्रिय"; अभिवादन: "सप्रेम नमस्ते", "शुभाशीष"।
पत्र की भाषा सरल
पत्र की भाषा सरल, स्पष्ट और आत्मीय होनी चाहिए।
