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पत्र लेखन: अनौपचारिक पत्र

"मित्रों और सगे-संबंधियों को लिखे जाने वाले अनौपचारिक पत्रों का प्रारूप और लेखन।"

FREE TOPIC 3 learning goals · Class 4 · Hindi · Topic 5

A Today you'll learn

  • पत्र लेखन के महत्त्व और उसके प्रकारों (औपचारिक और अनौपचारिक) को समझना
  • अनौपचारिक पत्र (सगे-संबंधियों, मित्रों को लिखे जाने वाले पत्र) का सही प्रारूप सीखना
  • संबोधन, अभिवादन, मुख्य विषय और समाप्ति को शिष्टाचार के साथ लिखना

B Let's understand

अ

पत्र लेखन दूर बैठे मित्रों, परिजनों और अधिकारियों तक अपने विचार, कुशल-क्षेम और संदेश पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम है। पत्र मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं: 1. अनौपचारिक पत्र: जो अपने माता-पिता, भाई-बहन, मित्रों और रिश्तेदारों को लिखे जाते हैं। 2. औपचारिक पत्र: जो प्रधानाचार्य, अधिकारियों या व्यापारिक संस्थाओं को लिखे जाते हैं। अनौपचारिक पत्र का प्रारूप: सबसे ऊपर बाईं ओर पत्र भेजने वाले का पता और दिनांक लिखा जाता है। फिर संबोधन (जैसे: पूज्य पिताजी, प्रिय मित्र), अभिवादन (जैसे: सादर प्रणाम, सप्रेम नमस्ते), उसके बाद कुशल-क्षेम और मुख्य संदेश लिखा जाता है। अंत में पत्र लेखक का संबंध और नाम (जैसे: आपका आज्ञाकारी पुत्र / तुम्हारी प्रिय सखी) लिखा जाता है।

C See it step by step

Example 1: मित्र को जन्मदिन की बधाई देने के लिए पत्र में संबोधन और अभिवादन क्या होगा?
  1. संबोधन: "प्रिय मित्र रोहन" या "प्रिय सखी स्नेहा"।
  2. अभिवादन: "सप्रेम नमस्ते" या "स्नेह मिलन"।
Example 2: पिताजी को पत्र लिखते समय अंत में क्या लिखा जाता है?
  1. पिताजी के प्रति आदर प्रकट करते हुए लिखा जाता है: "आपका आज्ञाकारी पुत्र / आपकी आज्ञाकारिणी पुत्री", और नीचे अपना नाम।

D Your turn

माता-पिता या मित्रों को लिखे जाने वाले पत्र कहलाते हैं:
Look back at "Let's understand" above for a clue.

E Ready to practise?

Ready for live, 1:1 teaching on this topic?